इस औषधीय पौधे की खेती के लिए अक्टूबर-नवंबर का महीना सबसे उपयुक्त होता है. कृषि विशेषज्ञ बताते हैं कि अगर खेत की मिट्टी भुरभुरी और नरम है तो पैदावार अच्छी होती है.

इस खास पौधे की खेती से मोटी कमाई कर रहे किसान, औषधीय गुणों से भरपूर होने के कारण मांग है ज्यादा
औषधीय पौधे किसानों की कमाई का अच्छा जरिया बन गए हैं. अन्नादाता की आय दोगुनी करने की दिशा में काम कर रही सरकार भी इन पौधों की खेती को प्रोत्साहित कर रही है. आज के समय में तमाम किसान अच्छी आय के लिए औषधीय पौधों की तरफ रुख कर रहे हैं. इन पौधों की खेती में लागत कम और कमाई ज्यादा है. वहीं मांग बढ़ने के कारण किसानों को अच्छा दाम मिल रहा है.

अगर आप भी औषधीय पौधे की खेती करने का मन बना रहे हैं तो अकरकरा आपके लिए एक अच्छा विकल्प है. डीडी किसान की रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा, गुजरात और महाराष्ट्र के किसान अब बड़े पैमाने पर अकरकरा की खेती कर रहे हैं. कुछ एक मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया है कि उत्तर प्रदेश के किसान आलू के विकल्प के तौर पर अकरकरा की खेती कर रहे हैं और कई गुना अधिक लाभ प्राप्त कर रहे हैं.

खेती के लिए सही समय अक्टूबर-नवंबर का महीना

इस औषधीय पौधे की खेती के लिए अक्टूबर-नवंबर का महीना सबसे उपयुक्त होता है. कृषि विशेषज्ञ बताते हैं कि अगर खेत की मिट्टी भुरभुरी और नरम है तो पैदावार अच्छी होती है. वहीं किसानों को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि अकरकरा की खेती उसी खेत में हो, जिसमें जल निकासी की अच्छी सुविधा हो. जल जमाव वाले खेत में अकरकरा की फसल प्रभावित हो जाती है और किसानों को नुकसान हो सकता है.

खेती करने वाले किसान बताते हैं कि अगर अकरकरा की पैदावार अच्छी हुई है तो एक एकड़ में दो क्विंटल तक बीज और 10 क्विंटल तक जड़े प्राप्त होती हैं. बाजार में इनकी कीमत 400 रुपए किलो तक है. एक अनुमान के मुताबिक, इस फसल की खेती से एक एकड़ में 4-5 लाख रुपए तक आसानी से कमाई हो जाती है जबकि खर्च 40 हजार रुपए आता है.

क्यों खास है अकरकरा

अपने औषधीय गुणों के कारण अकरकरा आयुर्वेद का एक खास पौधा है. बताया जाता है कि इसके सेवन से सर्दी-जुकाम और लकवा मरीजों को लाभ मिलता है. दंतमंजन बनाने से लेकर दर्द और थकान तक की दवाओं में इसका इस्तेमाल किया जाता है. आयुर्वेद के जानकार बताते हैं कि अकरकरा का इस्तेमाल लंबे समय से हो रहा है.