खेतों में महंगी दवाओं के स्प्रे से बढ़ता है खर्च: गुप्ता

 बीते दस दिन से क्षेत्र में धान रोपाई का कार्य जोरों पर है। पीआर धान की रोपाई का कार्य लक्ष्य के नजदीक है। बीएओ डा. राधेश्याम गुप्ता ने बताया कि एक अनुमान के अनुसार क्षेत्र में 60 फीसद धान रोपाई की जा चुकी है। रोपाई के साथ ही फसल में खुराक व खरपतवारों से सुरक्षा के लिए दवा भी डाली जा रही है। इसके बावजूद कई बार फसल में अधिक संख्या में खरपतवार उग जाते हैं जिन्हें नष्ट करना कठिन मुश्किल हो जाता है।

संवाद सहयोगी, निसिग : बीते दस दिन से क्षेत्र में धान रोपाई का कार्य जोरों पर है। पीआर धान की रोपाई का कार्य लक्ष्य के नजदीक है।

बीएओ डा. राधेश्याम गुप्ता ने बताया कि एक अनुमान के अनुसार क्षेत्र में 60 फीसद धान रोपाई की जा चुकी है। रोपाई के साथ ही फसल में खुराक व खरपतवारों से सुरक्षा के लिए दवा भी डाली जा रही है। इसके बावजूद कई बार फसल में अधिक संख्या में खरपतवार उग जाते हैं, जिन्हें नष्ट करना कठिन मुश्किल हो जाता है। इनके लिए बार बार महंगी दवाओं का स्प्रे करना पड़ता है। इससे किसानों का फसल पर खर्च अधिक बढ़ता है। खासकर उन खेतों में, जिनमें खरपतवार अधिक होते हैं।

उन्होंने बताया कि दवा डालने के बाद खेतों में पर्याप्त मात्रा में 15 दिन तक पानी जमा नही रहता। खेत में पानी कम होने से जमीन दिखाई देने लगती है। ऐसे स्थानों पर पानी में बनी दवा की लेयर टूटने से खरपतवारों का जमाव हो जाता है। किसानों को धान के खेत में पानी सूखने नहीं देना चाहिए। वहीं धान के एक खेत से पानी क्रास कर दूसरे खेत में पानी नहीं देना चाहिए। इससे खेत में पानी पर बनी दवा की लेयर टूटने से खरपतवारों का जमाव हो जाता है। इसका सीधा असर पैदावार को प्रभावित करता है।

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दो-तीन दिन में डालें खरपतवार नाशक दवा

बीएओ डा. राधेश्याम गुप्ता ने बताया कि धान रोपाई के अगले ही दिन या दो से तीन दिन में ही खरपतवार नाशक दवा डालनी चाहिए। ताकि खरपतवार के बीच अंकुर ना फूट सकें। अंकुर फूटने पर खेत का पानी कम हो जाता है। खरपतवार का जमाव नहीं रुकेगा। इससे धान में डाली गई खुराक को खरपतवार ग्रहण कर लेगा और धान के पौधे का फुटाव रुक जाएगा, जिससे पैदावार प्रभावित होगी। वहीं खरपतवार नष्ट करने पर किसान को अधिक खर्च भी करना पडेगा। धान की फसल में बरटा, सांवक व मौथा सहित कई अन्य खरपतवार उग जाते हैं।

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